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पुजा विवरण

~ हम प्रदान करते हैं ~

~ नारायणबली नागबली पितृदोष ~

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नारायण सुरश्रेष्ठ लक्ष्मीकांत वरप्रद ।
अनेन पुजनेनाथ प्रेतमोक्ष प्रदोभव ।।

मनुष्य के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है जितना कि जन्म। प्रत्येक व्यक्ति का मन असंख्य कामनाओं-वासनाओं का घर होता है। कभी-कभी मन की यह वासना अर्थात् कामना अधूरी रह जाती है और मृत्यु आ जाती है। मृत्यु के बाद, आत्मा की शेष वासनाएं जीव को जड़ता लाती हैं और मोक्ष को जाने नहीं देती। इससे आत्मा को दुर्गती प्राप्त होती है। साथ ही अपमृत्यु, आत्महत्या, सर्प दंश या ऐसी अकस्मात मृत्यु से भी आत्मा को दुर्गती प्राप्त होती है। इसी प्रकार यदि किसी पूर्वज का अंतिम संस्कार ठीक से न किया जाए तो भी आत्मा को दुर्गती प्राप्त होती है। उसका उद्धार उसके वंशजों पर निर्भर करता है। वह जीवात्मा जानता है कि, बिना नाक दबाए मुंह नहीं खुलता, जिससे वह अपने ही वंशजों के दैनिक जीवन में कठिनाइयाँ पैदा करता है। घरेलू अशांति, पारिवारिक कलह, शारीरिक/मानसिक रोग, धन धान्य और संतान संबंधी समस्याएं लाता है। इसे ही पितृदोष कहते हैं। फिर इन समस्याओं को दूर करने के लिए हमें नारायणबली का पुजन करना चाहिए। ताकि उन दुर्गती में जाने वाले पूर्वजों को सद्गति मिले और उनके आशीर्वाद से समस्याएं दूर हो जाएं। साथ ही यदि कुल में किसी ने नाग/सर्प को मारा हो, तो उस कुल को सर्पहत्या का दोष लग जाता है। इस कारणवश घर में संतती और संपत्ति की वृद्धि में बाधा आती है। इस दोष को दूर करने के लिए नागबली का पुजन किया जाता है। नारायण नागबली का पुजन आत्मकुल माने पितृकुल, मातृकुल और पत्नीकुल के सभी दुर्गती को प्राप्त हुए पुर्वजों को सद्गति देने के लिए और घर में सर्प वध के अपराध को दूर करने के लिए किया जाता है। यह तीन दिन का पुजन विधि है।

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